परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ (#8342)

हे तू जिसके परीक्षण उनके लिए जो तेरे निकट हैं रोग-निवारक औषधि हैं, जिसकी तलवार उन सब की प्रबल इच्छा है जो तुझसे प्रेम करते हैं, जिसका बर्छा उन सब की परम प्रिय कामना है, जो तेरी लालसा रखते हैं, जिसका आदेश उनकी एकमात्र आशा है जिन्होंने तेरे सत्य को स्वीकार कर लिया है। मैं तेरे दिव्य माधुर्य, और तेरे मुखमण्डल की महिमा की भव्यता के माध्यम से तुझसे याचना करता हूँ कि अपने उच्च एकांतवास से वह भेज जो हमें तेरे निकट पहुँचने के योग्य बनाये। तब, हे मेरे ईश्वर, अपने धर्म में, मेरे पगों को दृढ़ कर दे और अपने ज्ञान की दीप्ति से हमारे हृदयों को प्रकाशित कर दे, और अपने नामों की कांति से हमारे वक्षों को प्रदीप्त कर दे।

-Bahá'u'lláh
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परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ (#8344)

स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर! यदि वे दुःख न होते जो तेरे पथ में सहने पड़ते हैं तो तेरे सच्चे प्रेमी कैसे पहचाने जाते और यदि वे संकट न होते जो तेरे प्रेम के कारण उठाने पड़ते हैं तो, तेरी चाह रखने वालों के पद कैसे प्रकट होते? तेरी सामर्थ्‍य मेरी साक्षी है कि जो भी तेरी आराधना करते हैं, उन सबके सहचर, उनके बहाए हुए आँसू हैं और तेरी आकांक्षा करने वालों को सांत्वना देने वाले हैं उनके मुख से निकली आहें। जो तुझसे मिलने की शीघ्रता करते हैं, उनका आहार उनके टूटे हुए दिल के टुकड़े हैं।
मुझे कितना मधुर स्वाद देती है तेरे पथ में भोगी गई मृत्यु की कटुता और कितने अनमोल हैं मेरी दृष्टि में तेरी वाणी के यशोगान के बदले लगने वाले तेरे शत्रुओं के तीर। अपने धर्म की राह में तू जो चाहे वह सब विष मुझको पीने दे। अपने प्रेम में वह सब सहने दे मुझको, जिसका तूने आदेश दिया है। तेरी महिमा की सौगंध! जो तू चाहे बस वही मेरी भी इच्छा है और प्रिय है मुझको बस वही जो तुझको प्रिय है। हर समय बस तुझमें ही मैंने अपनी सम्पूर्ण आस्था रखी है।
मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे मेरे ईश्वर, कि तू इस धर्म के ऐसे सहायकों को उत्पन्न कर जो तेरे नाम और सम्प्रभुता के योग्य हों, ताकि वे तेरे प्राणियों के मध्य तुझे स्मरण कर सकें और तेरी धरा पर विजय-पताका फहरा सकें। तुझे जैसा अच्छा लगे वैसा करने में तू समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, संकट में सहायक, स्वयंजीवी।

-Bahá'u'lláh
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परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ (#8345)

तू प्रतापशाली है, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! अंतर्दृष्टि सम्पन्न प्रत्येक व्यक्ति तेरी सम्प्रभुता और तेरे अधिराज्य को स्वीकार करता है और प्रत्येक विवेकशील नेत्र तेरे वैभव की महानता और सामर्थ्‍य की बाध्यकारी शक्ति को देख पाता है ।
परीक्षाओं के प्रचंड झंझावात भी उन्हें रोक सकने में असमर्थ हैं। जो तेरी महिमा के क्षितिज को निहारते हैं, और तेरी निकटता का आनन्द पाते हैं; जिन्होंने तेरी इच्छा के प्रति स्वयं को पूरी तरह कर समर्पित कर दिया है, उन्हें तेरे सान्निध्य से दूर कर पाने में या तुझ तक पहुँचने में संकटों के झंझावात भी बाधा नहीं बन सकते। ऐसा लगता है कि उनके हृदय में प्रज्ज्वलित प्रेम के दीपक और ललक उठी है तेरी मृदुलता की ज्योति उनके वक्ष में है। विपदायें भी उन्हें तेरे धर्म से विमुख करने में असमर्थ हैं और भाग्य के उलट-फेर भी उन्हें तेरी सुप्रसन्नता के पथ से नहीं भटका सकते हैं।
मैं तुझसे याचना करता हूँ हे मेरे ईश्वर, उनके द्वारा और उनकी उन आहों के द्वारा जो तेरे वियोग में उनके हृदय से निकली हैं, कि उन्हें अपने विरोधियों के दुष्कृत्यों से सुरक्षित रख और उनकी आत्मा को उससे पोषित कर जिसका विधान तूने अपने उन प्रियजनों के लिये किया है जिन्हें कोई भय ग्रस्त नहीं करता और जिन पर कोई विपदा नहीं आयेगी।

-Bahá'u'lláh
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परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ (#8346)

हे मेरे ईश्वर, तू भलीभांति जानता है कि सभी दिशाओं से मुझ पर विपदायें टूट पड़ी हैं और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं जो उन्हें दूर कर सकता है या कम ही कर सकता है। तेरे प्रति अपने प्रेम के कारण मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू किसी भी आत्मा को तब तक विपदाग्रस्त नहीं करता जब तक तू अपने पावन स्वर्ग में उसके स्थान को ऊँचा करने का निर्णय नहीं ले लेता या जब तक यह भौतिक जीवन जीने के लिये उसके हृदय को सशक्त करने का तेरा इरादा नहीं होता। अपनी शक्ति के से तू ये सुरक्षा-कवच उसे इसलिये प्रदान करता है कि दुनिया के मिथ्या अभिमान के प्रति उसका झुकाव न हो जाये। यह सच है और तू भलीभाँति इससे परिचित भी है कि दुनिया और आसमानों के समस्त सुख से भी अधिक तेरे नाम के स्मरण में मैं प्रसन्नता का अनुभव करता हूँ।
हे मेरे ईश्वर, अपने प्रेम और अपनी आज्ञाओं के पालन में मेरे हृदय को सशक्त कर और ऐसा कर दे कि तेरे विरोधियों की छाया से मैं पूरी तरह दूर रह सकूँ। सत्य ही, मैं तेरी महिमा के नाम पर सौगन्ध लेता हूँ कि तेरे अतिरिक्त किसी अन्य की समीपता की कामना मैं नहीं करता और न ही तेरी दया के अतिरिक्त किसी अन्य की दया का पात्र ही बनना चाहता हूँ, न ही मुझे तेरे न्याय के अतिरिक्त किसी अन्य से न्याय पाने की अभिलाषा है।
तू परम् उदार है, हे आसमानों और धरा के ईश्वर, समस्त मानवों की स्तुति से परे तेरे आज्ञाकारी सेवकों को शांति प्राप्त हो और ईश्वर की महिमा बढ़े, तू ही सभी लोकों का स्वामी है!

-The Báb
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